अमेरिकी सेना का ईरान पर नया हमला, होर्मुज स्ट्रेट के पास मिलिट्री साइट को बनाया निशाना, मार गिराए कई ड्रोन

तेहरान: अमेरिकी सेना ने बुधवार रात को ईरान के अंदर नई मिलिट्री स्ट्राइक की है। इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। रॉयटर्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि इस ठिकाने से अमेरिकी सेना और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा किया जा रहा था। ये हमले तब किए गए, जब अमेरिका ने ईरान की तरफ से भेजे गए कई ड्रोन को मार गिराया और मिसाइल साइट पर बमबारी की।

अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ये हमले बचाव में की गई कार्रवाई थे। ईरान ने ड्रोन हमले की कोशिश की थी, जिससे होर्मुज में अमेरिकी सेनाओं और व्यापारिक जहाजों को खतरा पैदा हो गया था। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस ने एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि ईरान ने एक अमेरिकी व्यापारिक जहाज पर चार किलर ड्रोन दागे, जिसके जवाब में सेना ने जमीन पर मौजूद एक ड्रोन लॉन्च यूनिट पर हमला किया।

बंदर अब्बास शहर के पास धमाके

स्थानीय समय के अनुसार, रात करीब 1:30 बजे ईरान के बंदर अब्बास शहर के पास से चार धमाकों की खबर आई। ईरान के सरकारी टीवी ने बताया कि हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय थी। बंदर अब्बास में जिस सैन्य ठिकाने पर हमला किया गया, वह एक ईरानी ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन था, जो पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी में था।

एक अधिकारी ने कहा, "ये कार्रवाइयां नपी-तुली और पूरी तरह रक्षात्मक थीं और इनका मकसद युद्धविराम को बनाए रखना था।" बंदर अब्बास,फारस की खाड़ी में ईरान के सबसे अहम बंदरगाह है। इसके पहले अमेरिकी सेना ने सोमवार देर रात को इस शहर पर कई हमले किए थे, जिसमें एक मिसाइल लॉन्च साइट और समुद्री माइन बिछाने वाली दो नावें निशाना बनीं। सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता ने बताया था कि ये हमले आत्मरक्षा में किए गए थे।

ट्रंप ने कहा- ईरान समझौते के लिए तैयार

अमेरिका के ताजा हमलों से एक बार फिर से युद्ध शुरू होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने कहा है कि मौजूदा बातचीत बहुत अच्छी चल रही है और ईरान समझौता करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि वे हमें वे चीजें देना शुरू कर रहे हैं, जो उन्हें हमें देनी ही पड़ेंगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहेगा और अमेरिकी सेना इस पर नजर रखेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह तेहरान के कब्जे से बाहर रहे।

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