परीक्षा के तनाव में बच्चे अवसाद एवं आत्महत्या के शिकार होने से बचे 

बिलासपुर । संयुक्त महिला संगठन के द्वारा एक विचार उत्तेजक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था परीक्षा के परिणाम के तनाव में बच्चे अवसाद एवं आत्महत्या की शिकार हो रहे हैं यह हमारे समाज के लिए बहुत चिंतनीय है गोष्ठी की शुरुआत करते हुए अध्यक्ष विद्या के लिए ने कहा कि राजस्थान के शहर कोटा के बाद अब बिलासपुर में भी एक छात्रा ने आत्महत्या की है कोटा में तो निरंतर यह घटनाएं हो रही हैं हमें अपने बच्चों को समझना होगा कि उनके सामने छुने के लिए आकाश की अनंत ऊंचाइयां है सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाएं ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य नहीं होना चाहिए शिखा अग्रवाल ने कहा कि हमारा भोजन सात्विक होना चाहिए ताकि आचार विचार नींद सबसे संतुलन हो एक दूसरे से तुलना चिंता उदासीनता असंतोष खालीपन अपराध बोध यह सब अवसाद पैदा करते हैं शिल्पी चिडयि़ा का मानना था कि हमें अपने बच्चों को ध्यान व प्राणायाम सीखना चाहिए ताकि उनका चित्र नियंत्रण में रहे और उन्हें आत्मबोध हो इस उम्र में हार्मोंस परिवर्तन होता है उसे ध्यान में रखकर ही बच्चों को की प्रवेश करनी चाहिए कल्पना बुधौलिया के विचार थे की मां-बाप बच्चों पर बहुत सी अपेक्षाएं नहीं जल्द बहुत सी अपेक्षाएं लड़ देते हैं वास्तव में अपने-अपने हुए बच्चों के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं मंजू आर्य ने कहा कि बच्चे जानते ही नहीं की मां बाप ने कितना तब करके उन्हें पाला पोसा और पढ़ाया है मधु मित्तल ने कहा कि अब समय बदल गया है पुराने जमाने वाली डॉट डॉटबिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं होनी चाहिए आशा बजाज के अनुसार बच्चों का एक छिडक़ावेश पूरे परिवार के जीवन भर के दुख में दुआ देता है सुमन अग्रवाल ने बताया कि हर मां बच्चों को की रुचि के अनुसार आगे बढऩा चाहिए दूसरों के दिखा दे की अपने लिए ही घातक हो जाती है सावित्री अग्रवाल ने कहा कि हमें बच्चों के साथ फुल एचडी को विचारों से रहना चाहिए सभी सदस्यों की राजनीति की पढ़ाई के बाद मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग आवश्यक है पर गेम खेलने की अनुमति न दें कार्यक्रम में अग्रवाल युवा मंच जागृति शाखा के द्वारा अग्रवाल समाज में जो बच्चे 10वीं और 12वीं में 90त्न से अधिक अंक बोर्ड परीक्षा में प्राप्त किए हैं उनका सेल लेकर सम्मान किया गया

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