‘भारत बढ़ा सकता है परमाणु बम का भंडार’, इंड‍िया-कनाडा यूरेनियम डील पर भड़की पाकिस्तान सरकार

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने भारत और कनाडा के बीच 2 मार्च को किए गये यूरेनियन समझौते को लेकर चिंता जताई है। भारत और कनाडा ने एक ऐतिहासिक 2.6 अरब डॉलर के यूरेनियम सप्लाई एग्रीमेंट पर साइन किए हैं। इसके अलावा दोनों देश एक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर बातचीत को तेज करने पर सहमत हुए हैं।

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की तरफ से भारत और कनाडा के बीच हुए इस समझौते पर एक बयान जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि ‘पाकिस्तान, कनाडा और भारत के बीच किए गये दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते और दोनों पक्षों के बीच छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और एडवांस रिएक्टर तकनीकों पर संभावित सहयोग को चिंता की नजर से देख रहा है।’

पाकिस्तानी बयान में आगे कहा गया है कि "भारत ने न तो अपनी सभी नागरिक परमाणु सुविधाओं को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा उपायों के दायरे में रखा है और न ही इस व्यवस्था के तहत ऐसा करने की कोई बाध्यकारी प्रतिबद्धता जताई है। कई सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण से बाहर हैं। यह भी साफ नहीं है कि इस समझौते के साथ परमाणु अप्रसार के कौन से ठोस आश्वासन, यदि कोई हों, दिए गए हैं।"पाकिस्तान ने आगे चिंता जताते हुए कहा है कि इससे भारत तेजी से अपनी परमाणु क्षमताएं बढ़ा सकता है। इससे दक्षिण एशिया में रणनीतिक विषमताएं और गहरी होती हैं।

भारत-कनाडा यूरेनियम समझौता क्या है?

कनाडा के साथ किए गये यूरेनियम डील का मकसद भारत के नागरिक न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम के लिए लंबे समय तक फ्यूल सप्लाई पक्का करना है। कार्नी ने कहा था कि दोनों पक्ष 2026 के आखिर तक बड़े CEPA ट्रेड पैक्ट को पूरा करने का लक्ष्य बना रहे हैं। इस डील के तहत कनाडा की कंपनी Cameco भारत को अगले 9 सालों तक यानि 2027 से 2035 तक 22 मिलियन पाउंड यूरेनियम की सप्लाई करेगी।

भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए यूरैनियम (ईंधन) की भारी जरूरत है। इसके अलावा दोनों देश स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर और एडवांस रिएक्टरों पर भी मिलकर काम करेंगे। ये छोटे रिएक्टर बिजली ग्रिड को मजबूती देते हैं।

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