MP में मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत, मानसून सत्र से पहले सजेगी मोहन यादव की नई टीम, कैबिनेट में शामिल होंगे 4 नए चेहरे

भोपाल। लगभग ढाई वर्ष के कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की टीम यानी मंत्रिमंडल में विस्तार के संकेत मिले हैं। फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार की समय-सीमा निर्धारित नहीं है लेकिन यह तय है कि जून या मध्य प्रदेश विधानसभा के पावस (मानसून) सत्र से पहले मंत्रिमंडल में बदलाव व विस्तार का काम पूरा कर लिया जाएगा। मोहन मंत्रिमंडल में वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत 31 मंत्री हैं, जबकि मंत्रिमंडल में कुल 35 मंत्री हो सकते हैं। अभी चार पद रिक्त हैं।

बता दें कि लंबे समय से विस्तार की चर्चाएं चल रही हैं। यह भी बताया जा रहा है कि संतुलन बनाने के लिए कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी की जा सकती है। आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के लिए विस्तार किया जाएगा। माना जा रहा है कि विंध्य, महाकोशल और ग्वालियर-चंबल जैसे क्षेत्रों को नया प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

विलंब से हो रहा मंत्रिमंडल विस्तार

मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में एक साथ वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे, लेकिन छत्तीसगढ़ में काफी पहले कैबिनेट विस्तार हो चुका है। छग की विष्णु देव साय सरकार ने प्रशासनिक कसावट और क्षेत्रीय समीकरणों को समय रहते दुरुस्त कर लिया है। वहां अगस्त 2025 में ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर तीन मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी। मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ के मुकाबले वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और कई बार के विधायकों की संख्या बहुत अधिक है।

महाकोशल, विंध्य, और ग्वालियर-चंबल जैसे अंचलों से कई दिग्गज कतार में हैं, जिसके कारण केंद्रीय नेतृत्व को समीकरण साधने में लंबा समय लगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट के पुनर्गठन का काम तो आरंभ कर दिया गया है, जून अंतिम या जुलाई के पहले पखवाड़े तक इसे पूरा कर दिया जाएगा। 13 मई को मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के ढाई साल पूरे हो गए हैं। पार्टी ने अब मिशन 28 की तैयारी भी आरंभ कर दी है।

मुख्यमंत्री डा मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य वरिष्ठ नेता 17 मई को मंत्रियों के साथ अलग-अलग बातचीत भी करेंगे। इस आधार पर किन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, उन्हें चिह्नित किया जाएगा।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुछ विवादों में रहने वाले वरिष्ठ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर भी किया जा सकता है। ये वे मंत्री हैं, जो सरकार के सामने कई बार असहज स्थिति खड़ी कर चुके हैं। इस बारे में केंद्रीय नेतृत्व ने भी मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को संकेत दे दिया है।

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