बड़ा तालाब-बिसनखेड़ी, गौरागांव में सबसे ज्यादा अतिक्रमण, सर्वे नहीं:एसडीएम बोलीं- 2 दिन में टीम बना देंगे

NGT (नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल) की फटकार के बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बड़ा तालाब के सीमांकन के लिए 4 एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी है। बैरागढ़ क्षेत्र में काम शुरू भी हो चुका है, लेकिन जिस हिस्से- बिसनखेड़ी, गौरागांव और सूरजनगर में सबसे ज्यादा अतिक्रमण या कब्जा है, वहां अब तक नपती शुरू नहीं हुई है। यहीं पर कई रसूखदारों के घर, रिसॉर्ट या फार्म हाउस है।

दैनिक भास्कर की टीम बड़ा तालाब के इन्हीं हिस्सों में पहुंच चुकी है। यहां एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बने हुए हैं। ऐसे 1 या 2 नहीं, बल्कि सैकड़ों निर्माण है। भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव और सूरजनगर में बड़ी बिल्डिंग, फार्म हाउस, रिसोर्ट भी है।

यहां कार्रवाई का जिम्मा टीटी नगर एसडीएम अर्चना रावत का हैं, लेकिन उन्होंने अब तक कार्रवाई शुरू नहीं की। इस संबंध में उन्होंने कहा कि शु़क्रवार को टीम गठित कर देंगे। राजस्व, नगर निगम-टीएंडसीपी की संयुक्त टीम बनाएंगे। इसके बाद सर्वे शुरू करेंगे।

3 में से दो एसडीएम की कार्रवाई नहीं बड़ा तालाब का बड़ा हिस्सा शहर वृत्त, हुजूर और बैरागढ़ अनुभाग में भी आता है। बैरागढ़ अनुभाग ने तो गुरुवार से ही सीमांकन शुरू कर दिया था। इसमें खानूगांव में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का कॉलेज तक सीमांकन हो चुका है। बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय ने बताया कि खानूगांव और बैरागढ़ इलाके में सीमांकन किया है। अगले दो दिन में सीमांकन पूरा कर लेंगे।

हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया ने बताया कि बड़ा तालाब का कम ही हिस्सा है। इसका सर्वे कराएंगे। शहर वृत्त एसडीएम दीपक पांडे ने कार्रवाई शुरू नहीं कराई। इस वजह से उनके यहां बड़ा तालाब किनारे कितने अतिक्रमण है, यह पता नहीं चल पाएगा।

अभी एफटीएल तय करेंगे, कार्रवाई बाद में बड़ा तालाब किनारे अवैध कब्जे को लेकर पर्यावरणविद राशिद नूर ने याचिका दाखिल की थी। इसके बाद एनजीटी ने सीमांकन करने के आदेश दिए हैं। बैरागढ़ तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह ने बताया कि अभी एफटीएल के अनुसार सीमांकन कर रहे हैं। यह रिपोर्ट एनजीटी में प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद हटाने की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर करेंगे।

एक्सपर्ट नूर ने बताया, बड़ा तालाब रामसर साइट है। नियम अनुसार, शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बने हुए हैं।

दो तरह की मुनारें बड़ा तालाब के किनारों पर भू-माफिया भी सक्रिय है, जो कम दाम पर प्लाट देने का वादा कर रहे हैं। उन्होंने और लोगों ने इस दायरे को लेकर ही भ्रम की स्थिति भी खड़ी की है। जिन मुनारों से एफटीएल की सीमा तय होती है, उन्हीं में फर्जीवाड़ा भी किया गया है। मौके पर एफटीएल बताने वाली 5 तरह की मुनारें लगी हुई है। इनमें से एक में बीएमसी यानी, भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन लिखा है। बाकी पर सफेद रंग है। लिखा कुछ नहीं है। इन्हीं फर्जी मुनारों के आसपास अतिक्रमण और अवैध निर्माण है।

एनजीटी ने दो सप्ताह में मांगी है रिपोर्ट बड़ा तालाब के अतिक्रमण पर हाल ही में एनजीटी फिर सख्त हुआ। इसके बाद सर्वे शुरू किया गया। याचिका पर्यावरणविद् नूर ने लगाई थी। इस पर एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का नियम-4 अब पूरे मध्यप्रदेश के सभी जलाशयों पर लागू होगा।

बड़ा तालाब का सिर्फ कागजों का मामला नहीं, बल्कि भोपाल के पर्यावरण संतुलन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। तालाब में अब 41 नालों से सीवेज गिर रहा है और 227 अतिक्रमण अब तक हटाए नहीं गए। एनजीटी ने दो सप्ताह में सीमांकन रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।

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