भोपाल पुलिस का नया मॉडल, मोहल्ले में लगे QR कोड को स्कैन करते ही सीधे कमिश्नर कार्यालय पहुंचेगी शिकायत

 भोपाल। राजधानी में पुलिसिंग का एक नया मॉडल तैयार हो रहा है। अपराधों पर नियंत्रण के साथ अब पुलिस आम नागरिकों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने और तत्काल समाधान पर जोर दे रही है। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत शुरू किए गए नए मॉडल में अब लोगों को छोटी-बड़ी शिकायत लेकर केवल थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि पुलिस खुद उन तक पहुंच रही है।

गली-मोहल्लों में क्यूआर कोड लगाए जा रहे

शिकायतों के लिए गली-मोहल्लों में क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। साथ ही शिकायतों के लिए पुलिस कमिश्नर की मॉनिटरिंग टीम का एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार की पहल पर शहर में यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य अपराध नियंत्रण के साथ पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और जनता का भरोसा मजबूत करना है।

क्यूआर कोड से सीधे दर्ज होगी शिकायत

इस अभियान के तहत शहर के गली-मोहल्लों, बाजारों और कालोनियों में विशेष क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। नागरिक अपने मोबाइल फोन से इन क्यूआर कोड को स्कैन कर सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत दर्ज होते ही उसकी जानकारी पुलिस कमिश्नर कार्यालय की मॉनिटरिंग टीम तक पहुंच जाएगी। पहले यह व्यवस्था केवल कुछ पुलिस थानों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे मोहल्ला स्तर तक विस्तारित किया जा रहा है।

हेल्पलाइन नंबर पर सीधे संपर्क

भोपाल पुलिस ने जनता की सुविधा के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर 7587648330 जारी किया है। इस नंबर पर फोन कर लोग अपराध, नशाखोरी, जुआ-सट्टा, ट्रैफिक अव्यवस्था, अवैध गतिविधियों और पुलिसकर्मियों के व्यवहार से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है, ताकि कार्रवाई में देरी न हो।

जनता से सीधा संवाद

सामुदायिक पुलिसिंग अभियान के तहत पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर स्थानीय लोगों से सीधे संवाद भी कर रहे हैं। इन बैठकों में क्षेत्र की समस्याएं, असामाजिक गतिविधियां, युवाओं में बढ़ती नशाखोरी और ट्रैफिक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों ने संबंधित थाना पुलिस को कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

अधिकारियों का क्या कहना

“कई बार लोगों की शिकायतों पर थाना स्तर पर समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती या फिर आवेदकों को अनदेखी का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में भ्रष्टाचार और पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब शिकायतों को सीधे पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।”

– संजय कुमार, पुलिस आयुक्त, भोपाल

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