बस कुछ दिन और… फिर लग जाएगी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग! जानें कब से बढ़ सकते हैं दाम

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसका असर भारत की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। तेल कंपनियों को बड़ा घाटा हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में पेट्रोल-डीजल आदि की कीमतों में इजाफा नहीं किया है। यह भार कंपनियां खुद उठा रही हैं जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। माना जा रहा है कि सरकार आने वाले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा कर सकती है।

पिछले कुछ हफ्तों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। काफी लंबे समय से ब्रेंट ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। इसके बावजूद भारत में ईंधन की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई थीं। अभी ब्रेंट क्रूड 101.3 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड (WTI) 95.42 डॉलर प्रति बैरल पर है।

सरकार पर पड़ रही मार

  • कच्चे तेल और गैस की ऊंची कीमतों के कारण सरकार को प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
  • जब कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल पर था, तब सरकार ने जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का बोझ खुद उठाया।
  • अप्रैल के अंत तक तेल कंपनियों का घाटा 30,000 करोड़ रुपये था, जिसके इस तिमाही के अंत तक 50,000 करोड़ रुपये से ऊपर जाने का अनुमान है। गैस पर भी 20,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त घाटा है।
  • सरकार हर 14 किलो के सिलेंडर पर 600 रुपये (उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त 300 रुपये) का बोझ खुद सह रही है।

होर्मुज संकट से बिगड़ी स्थिति

होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की एनर्जी लाइफलाइन है। इतिहास में कभी भी यह मार्ग इतने लंबे समय तक बंद नहीं रहा। 1970 के तेल प्रतिबंध या 1980 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी नहीं। जहाजों को अब ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते घूमकर आना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में 2-3 हफ्ते की देरी और 15 से 20% मालभाड़ा बढ़ गया है। साथ ही समुद्री बीमा प्रीमियम की दरें भी आसमान छू रही हैं।

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