बिहार की सम्राट सरकार पर नीतीश की निगहबानी! तीसरी आंख की रोल में रहेंगे सुशासन बाबू
पटना: न्याय यात्रा, विकास यात्रा और समृद्धि यात्रा। इनके नाम पर जनता के मर्म को समझने और राज्य सरकार के कार्यों का मूल्यांकन करने का सफर है। नीतीश कुमार अब अपनी यात्रा का क्या नाम देते हैं, यह पता नहीं। लेकिन, मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रहते, यात्रा तो तय कर ही लिया। अब वे बिहार की जनता के प्रति ‘तीसरी आंख’ की भूमिका निभाएंगे। अब इसे नीतीश कुमार का सोशल अटैक कहें या वर्तमान सरकार की निगहबानी। मगर, इतना तो तय है कि वर्तमान सरकार को ‘खुले सांड’ की तरह नहीं छोड़ने वाले।
नीतीश नीति पर चलेगी सरकार!
बिहार के सियासी गलियारों में जब से बीजेपी के मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा शुरू हुई तब से उसके पैरलल ‘नीतीश नीति’ पर चलेगी सरकार की भी चर्चा होती रही। न केवल नीतीश कुमार बल्कि उनके वरीय और कनीय नेता भी एक ही राग अलाप रहे थे कि मुख्यमंत्री बनने का मतलब ये नहीं कि बीजेपी कोई अपना एजेंडा चला दे। इसलिए, पंचायत से लेकर राजधानी तक में राज्य सरकार के क्रिया-कलाप पर नजर रखी जाएगी। नीतीश कुमार की यात्रा पर निकलने की जो प्लानिंग बनी है, उसके पीछे का मकसद है कि बीजेपी कहीं अंदरूनी एजेंडे को राह देने में तो नहीं लगी।
राजस्व विभाग के फैसले पर भी सवाल!
जदयू सूत्रों की मानें तो राजस्व विभाग के एक विवादित फैसला भी नीतीश कुमार के संज्ञान में लाया गया है। हुआ ये कि सत्ता में आने के बाद सम्राट चौधरी ने राजस्व विभाग के एक पुराने फैसले को पलट दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे हड़बड़ी में लिया गया निर्णय बताया जा हैं।
