ओमप्रकाश राजभर ने संघर्ष के दिनों का सुनाया किस्सा, बोले- ट्रैफिक इंस्पेक्टर के चांटे ने बदली किस्मत

गाजीपुर: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर रविवार को गाजीपुर में थे। वह शिक्षा अनुदेशकों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने गाजीपुर में अपने संघर्ष के दिनों का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे बनारस में ऑटो चलाते समय एक पुलिस अधिकारी के दो थप्पड़ों ने उनके भीतर राजनीति में आगे बढ़ने की आग जगा दी।

ओमप्रकाश राजभर ने सुनाया पुराना किस्सा

ओमप्रकाश राजभर ने यह कहानी कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित अनुदेशक सम्मान समारोह में अपने संबोधन के दौरान साझा की। उन्होंने बताया कि जब वे बनारस में पढ़ाई करते थे, तब रात में ऑटो रिक्शा चलाकर अपना खर्च निकालते थे। दिन में पढ़ाई और रात में मेहनत करना ही उनकी दिनचर्या थी।

‘ ट्रैफिक पुलिस ने मारा था थप्पड़ ‘

मंत्री ने बताया कि एक दिन वह अंधरापुल इलाके में ऑटो चला रहे थे। उन्होंने तीन सवारी की जगह पांच सवारी बैठा ली थी। इस दौरान तिराहे पर एक टीआई ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रुके। कुछ दूर जाने के बाद पुलिस अधिकारी ने उन्हें पकड़ लिया और दो-तीन थप्पड़ जड़ दिए। राजभर के मुताबिक, उस दिन उन्होंने पुलिस अधिकारी से कहा था कि यह उनकी मजबूरी है, इसलिए वे ऑटो चला रहे हैं। इसके बाद उन्हें पुलिस लाइन ले जाया गया, हालांकि बाद में छोड़ दिया गया।

‘थप्पड़ ने बदली किस्मत’

राजभर ने कहा कि उस घटना ने उनके भीतर कुछ बदल दिया। उन्होंने उसी दिन मन में ठान लिया था कि आज इन्होंने मारा है, एक दिन ऐसा आएगा जब यही लोग सलाम करेंगे। उनकी मुलाकात बाद में बहुजन राजनीति के बड़े नेता कांशीराम से हुई। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा नाम बन गए।

‘मंत्री बनने पर पुलिस अधिकारी के गए घर’

साल 2017 में जब ओमप्रकाश राजभर मंत्री बने, तो उन्होंने उस टीआई के बारे में जानकारी निकलवाई। पता चला कि वह पुलिस अधिकारी इलाहाबाद के रहने वाले थे और रिटायर हो चुके थे। राजभर खुद उनके घर पहुंचे, उन्हें सलाम किया और कहा कि अगर आपने मुझे दो थप्पड़ नहीं मारा होता, तो शायद वह आज मंत्री नहीं बन पाते।

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