टेड़गा तालाब बना अमृत सरोवर- सिंचाई, मत्स्य पालन और आर्थिक सशक्तीकरण का केंद्र

कोरिया :  जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है टेड़गा तालाब, जिसे महात्मा गांधी नरेगा के तहत मिशन अमृत सरोवर में पुनर्जीवित किया गया। अब यह सिर्फ जल संग्रहण का स्रोत नहीं, बल्कि सिंचाई, मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका का मजबूत आधार बन गया है।

तालाब पुनरोद्धार से बहुआयामी लाभ

कोरिया जिले के सोनहत जनपद के ग्राम पुसला में स्थित टेड़गा तालाब, देखरेख के अभाव में सिकुड़ता जा रहा था। गाद जमने के कारण इसकी जलभराव क्षमता घट गई थी, जिससे गर्मियों में पानी का संकट गहरा जाता था, लेकिन 9.71 लाख रुपये की लागत से इसे गहरीकरण कर पुनर्जीवित किया गया। अब तालाब में 10,000 घनमीटर जलभराव क्षमता है, जिससे किसानों को सालभर पानी उपलब्ध हो रहा है। 09 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा बढ़ी, जिससे 22 हेक्टेयर खरीफ और 05 हेक्टेयर रबी फसल को पानी मिल रहा है।महिला स्व-सहायता समूहों ने तालाब को लीज पर लेकर मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें 08 क्विंटल मछली उत्पादन और 1.60 लाख रुपये की आय हुई।

गांव में खुशहाली का नया स्रोत
ग्राम पंचायत पुसला के किसानों राजाराम, फुलेश्वरी, शंकरलाल और कृष्णा ने बताया कि पहले तालाब सूखने की कगार पर था, लेकिन अब यह गांव की आजीविका और जल स्रोत का आधार बन गया है। महिलाओं ने रोहू, कतला और मृगल मछली उत्पादन से आर्थिक स्वतंत्रता की ओर कदम बढ़ाए हैं। तालाब के किनारों पर पौधारोपण कर इसे और सुंदर बनाया गया है, जिससे यह एक आदर्श जल संरक्षण मॉडल बन गया है। यह सफलता दर्शाती है कि सही योजना और सामुदायिक सहभागिता से जल संसाधनों का बहुद्देशीय उपयोग किया जा सकता है।

अमृत सरोवर-गांव की तरक्की का प्रतीक
टेड़गा तालाब अब सिर्फ जलाशय नहीं, बल्कि एक सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उदाहरण बन गया है। यह दिखाता है कि मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाएं जल संरक्षण, कृषि और ग्रामीण जीवन में स्थायी बदलाव ला सकती हैं।

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