अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने प्रशिक्षण सह उत्पादन केन्द्र का किया अवलोकन

दंतेवाड़ा। अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ ने सोमवार को दंतेवाड़ा प्रवास पर राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा संचालित प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्र का अवलोकन किया। 

इस दौरान उन्होंने केंद्र में संचालित फैशन डिजाइन, हैंडलूम एवं पावरलूम से संबंधित प्रशिक्षण गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों से चर्चा कर प्रशिक्षण की वर्तमान संरचना, कौशल विकास की प्रक्रिया और प्रशिक्षण उपरांत रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान अपर मुख्य सचिव ने केंद्र की दीर्घकालीन स्थिरता एवं भविष्य की कार्ययोजना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उत्पादन इकाई का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षुओं द्वारा निर्मित वस्त्र एवं अन्य उत्पादों को देखा और उनकी गुणवत्ता की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि “माई जी वेलफेयर सोसाइटी” का गठन किया जा चुका है, जिसके माध्यम से उत्पादन इकाई को सुदृढ़ एवं स्थायी रूप से स्थापित किया जाएगा तथा उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने लाइवलीहुड कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित विभिन्न ट्रेडों का निरीक्षण किया और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुनर्वासितों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा केवल प्रशिक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात वे स्वयं का उद्यम स्थापित कर सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने पुनर्वासितों को वेलकम किट वितरित कर उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उल्लेखनीय है कि केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुनर्वासितों की दिनचर्या अनुशासित एवं उद्देश्यपूर्ण है। प्रतिदिन प्रातः व्यायाम और योग के साथ दिन की शुरुआत होती है, जिसके बाद निर्धारित समयानुसार सैद्धांतिक और प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षुओं को वस्त्र निर्माण, डिजाइनिंग, करघा संचालन, सिलाई-कढ़ाई, उत्पाद गुणवत्ता प्रबंधन तथा विपणन से संबंधित व्यवहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है। दोपहर पश्चात उत्पादन इकाई में उन्हें बाजार उन्मुख उत्पाद तैयार करने का अभ्यास कराया जाता है, जिससे वे वास्तविक कार्य परिस्थितियों का अनुभव प्राप्त कर सकें। साथ ही व्यक्तित्व विकास, वित्तीय साक्षरता एवं उद्यमिता से जुड़े सत्रों के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार के लिए भी तैयार किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्र पुनर्वासितों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है, जो उन्हें आत्मविश्वास, कौशल और सम्मानजनक जीवन की नई राह प्रदान कर रहा है। इस दौरान आईजी बस्तर सुन्दरराज.पी, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे तथा डीएसपी नसीर सिद्दीकी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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