लोकसभा के मद्देनजर भाजपा की दक्षिण पर नजर

नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं। भाजपा ने ईसाई बाहुल्य राज्य केरल सहित दक्षिण और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में अपनी पैठ बनाने शुरू कर दी है। विधानसभा में भाजपा को केरल में हार मिली थी लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है। केरल में जीत के लिए ईसाइयों को समर्थन जरूरी है। इसलिए भाजपा अब ईसाई समुदाय पर फोकस कर रही है। ईसाइयों को रिझाने के लिए भाजपा बीतें दिनों से लगातार कई अभियान चला रही है। कुछ दिनों पहले बड़े ईसाई नेताओं के घर जाकर उन्हें बुके दिए गए। अब भाजपा ने केरल में क्रिसमस के बीच स्नेह यात्रा शुरू की है। स्नेह यात्रा एक संपर्क कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य राज्य में ईसाई समुदाय को पार्टी से जोड़ना है। 
इस बीच क्रिसमस के त्योहार पर जहां भाजपा नेता चर्चों में पहुंचकर ईसाईयों से मिल रहे हैं और ईसा मसीह से आशीर्वाद ले रहे हैं, वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक निवास पर ईसाई समुदाय के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने ईसाइयों के देश के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को भी याद किया और देश को आगे बढ़ाने में ईसाई समुदाय की भूमिका को भी स्वीकार किया। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने क्रिसमस पर चर्च पहुंचकर ईसाईयों को क्रिसमस की बधाई दी है। पीएम मोदी और भाजपा की इस पहल को कहीं न कहीं केरल, मेघालय और मणिपुर में ईसाई असंतोष पर घाव लगाने की कोशिश से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पीएम मोदी और भाजपा नेताओं के ईसाई समुदाय के लोगों से मिलने को 2024 के लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि जिस तरह इंडिया गठबंधन ने भाजपा को उत्तर भारत में चुनौती देने की कोशिश की है, उससे पार्टी को क्षेत्र में कुछ परेशानी हो सकती है। यूपी-बिहार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उसे कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए भाजपा ने ईसाईयों का भरोसा जीतने के लिए दक्षिण भारत में अपना विस्तार करने की कोशिश करेगी। लेकिन दक्षिण भारत में हिंदुओं की अपेक्षाकृत कम संख्या, द्रविड़ राजनीति के प्रभाव और ईसाई समुदाय की बहुलता के कारण उसका यह सपना तब तक साकार नहीं हो सकता जब तक कि दक्षिण का कोई प्रभावशाली समूह उसके साथ न जुड़े। जिताऊ समीकरण के लिए उसे दक्षिण भारत में भी उसी तरह के भरोसेमंद वोटरों की तलाश है जैसा कि उत्तर भारत में सवर्ण मतदाताओं ने उसके लिए आधार तैयार किया है। यह आधार ईसाई वोट बैंक में मिल सकता है। इसके लिए भाजपा को ईसाई समुदाय को भरोसे में लेना होगा। जिसके लिए उसने कांग्रेस से भाजपा में आए केरल के नेता टॉम वडक्कन के नेतृत्व में राष्ट्रीय ईसाई मंच बनाकर शुरू कर दिया है।

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