भोपाल के ट्रैफिक पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम पर NGT में याचिका:बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर प्रशासन

भोपाल, भोपाल के ट्रैफिक पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से बढ़ रहे ध्वनि प्रदूषण का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) पहुंच गया है। पर्यावरणविद् राशिद नूर की याचिका पर एनजीटी ने प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश जारी किए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

सेंट्रल जोन बेंच ने संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई में न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल रहे।

क्या है पूरा मामला 

याचिका में बताया गया है कि भोपाल में स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस ने कई चौराहों और सड़कों पर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगाए हैं। इनसे पूरे दिन तेज आवाज में ट्रैफिक संदेश, चेतावनी और निर्देश चलते रहते हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, इनकी आवाज बहुत तेज है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है और यह स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है।

अस्पताल और साइलेंस जोन में भी शोर का आरोप

याचिकाकर्ता का कहना है कि ये सिस्टम कई बार अस्पताल, स्कूल, कोर्ट और रिहायशी इलाकों के पास भी चलाए जा रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार इन जगहों पर शोर पर सख्त रोक होती है। इसे पर्यावरण कानून और ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन बताया गया है।

NGT ने कहा- सेहत पर पड़ रहा असर 

एनजीटी ने माना कि लगातार तेज आवाज सिर्फ असुविधा नहीं है, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए गंभीर समस्या है। इससे तनाव, चिड़चिड़ापन, नींद में दिक्कत और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।

अदालत ने कहा कि हर नागरिक को शांत और प्रदूषण-मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार है।

तत्काल कार्रवाई के निर्देश 

एनजीटी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी सिस्टम जो बिना अनुमति या तय डेसिबल सीमा से ज्यादा आवाज कर रहे हैं, उन्हें तुरंत बंद या नियंत्रित किया जाए।

जवाब तलब और रिपोर्ट मांगी

एनजीटी ने सभी संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कार्रवाई करने को कहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार हफ्ते में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

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