भोपाल में पहली बार रेलवे के अंडरपास जैसा स्ट्रक्चर:50 साल पुराने नाले पर बनेगा; डेढ़ महीने पहले एमपी नगर में धंसी थी सड़क

भोपाल में पहली बार पीडब्ल्यूडी रेलवे के अंडरपास जैसा स्ट्रक्चर बनाने जा रहा है। एमपी नगर के 50 साल पुराने नाले पर प्री-कास्ट तकनीक इस्तेमाल होगी। जिसमें रेलवे के अंडरपास की तरफ 32 बॉक्स बनाकर रखे जाएंगे। इस पर कुल 95 लाख रुपए खर्च होंगे। खास बात ये है कि यदि पीडब्ल्यूडी नाले का पक्का स्ट्रक्चर बनाता है तो 3 महीने लगते हैं, लेकिन प्री-कास्ट बॉक्स से सिर्फ 3 से 4 दिन में ही ट्रैफिक दौड़ने लगेगा।

बोर्ड ऑफिस चौराहे से एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई को नाले के ऊपर बनी सड़क धंस गई थी। इसे अगले दो से तीन दिन में ठीक किया गया तो अगले हिस्से की सड़क धंसने लगी। तभी से आधी सड़क पर बेरिकेडिंग की गई है। इस वजह से कई बार जाम की स्थिति भी बनती है। इसे लेकर पीडब्ल्यूडी ने प्लान तैयार किया।

पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर संजय मस्के ने बताया कि बोर्ड ऑफिस चौराहे से एमपी नगर चौराहे के बीच नाले की सड़क धंसी थी। एमपी नगर की बसाहट के दौरान करीब 50 साल पहले पत्थरों की दीवार का नाला बना था। उस समय इसके ऊपर पुलिया नहीं बनाई गई, बल्कि उसे अंडरग्राउंड कर दिया गया। कुछ साल पहले निगम ने नाले के ऊपर ही पब्लिक टॉयलेट बना दिया। सफाई नहीं होने और पानी के प्रेशर के कारण सड़क धंस गई थी।

इसे ठीक करने के लिए पहली बार रेलवे के अंडरपास जैसा स्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं। इसमें मौके पर पक्का स्ट्रक्चर न बनाते हुए प्री-कास्ट बॉक्स लाए जाएंगे। इसके बाद इन्हें नाले की जगह पर रखा जाएगा। कुल 32 बॉक्स रहेंगे। जिनकी ऊंचाई ढाई मीटर और इतनी ही चौड़ाई रहेगी।

कम समय में जल्दी बनेगा चीफ इंजीनियर मस्के ने बताया, तकनीक के जरिए काम होने से 3 से 4 दिन ही लगेंगे। इससे सड़क ज्यादा दिन के लिए बंद नहीं करना पड़ेगी, लेकिन यदि मौके पर ही सीमेंट क्रंकीट से स्ट्रक्चर बनाते हैं तो इसमें ढाई से तीन महीने का समय लग सकता है। ऐसे में ट्रैफिक बंद रहेगा और लाखों लोगों को परेशानी हो सकती है।

टेंडर प्रक्रिया की, बारिश बाद काम इस काम के लिए पीडब्ल्यूडी ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन काम बारिश के बाद ही होगा। अक्टूबर में काम की शुरुआत किए जाने की बात कहीं जा रही है।

2002 में पीडब्ल्यूडी को सौंपा था नाला जानकारी के अनुसार, यह नाला पीडब्ल्यूडी संधारण संभाग क्रमांक-2 भोपाल के अंतर्गत आता है। इसका निर्माण राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) ने किया था। जिसे साल 2002 में पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित कर दिया था। मार्ग के बाईं ओर ज्योति टॉकीज के पास स्थित लगभग 50 वर्ष पुराना पत्थर की दीवारों से निर्मित और अंडरग्राउंड नाला है।

समय के साथ इस नाले के दोनों छोरों को नगर निगम ने कवर कर दिया। वहीं, अपस्ट्रीम हिस्से पर एक सार्वजनिक सुलभ शौचालय का निर्माण भी कर दिया गया है। इस कारण नाले की न तो सफाई हो सकी और न ही निरीक्षण हो सका। हर साल बारिश में यह नाला सफाई से रह जाता, जबकि निगम का फोकस अन्य नालों पर रहता है

कई इलाकों का आता है पानी यह नाला एमपी नगर जोन-1 से जोन-2 की ओर जल निकासी के लिए बना है। इसके अपस्ट्रीम की ओर बाईं दिशा से जुड़ी एक छोटी नाली का पानी भी इसी मुख्य नाले से आता है। दीवार पर दबाव बढ़ने के कारण उसकी संरचना प्रभावित हुई और मार्ग के एक हिस्से में गड्ढा बन गया।

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